~ राह चलते मुसाफिरों को दोस्त बना लिया करो,
बातों ही बातों में उन्हें अपने सपनों के बारे में बता दिया करो।
क्या पता वो तुम्हारी बातों का यकीन कर लें,
क्या पता वो तुम्हारे सपनों की ही इज़्ज़त रख लें।
क्या पता कि तुम दोस्त रहो या न रहो,
क्या पता फिर से अंजान मुसाफिर ही क्यों न बन जाओ।
पर जब तुम्हारे कामयाब होने कि खबर उन तक पहुंचेगी,
तुम्हारी बातें उनके कानों में एक बार फिर से दस्तक देगी।
क्या पता तुम्हारी कामयाबी की खुशी तुमसे ज्यादा उन्हें हो जाए,
क्या पता तुम्हारी कामयाबी किसी अंजान मुसाफ़िर की कामयाबी की वजह बन जाए..
बातों ही बातों में उन्हें अपने सपनों के बारे में बता दिया करो।
क्या पता वो तुम्हारी बातों का यकीन कर लें,
क्या पता वो तुम्हारे सपनों की ही इज़्ज़त रख लें।
क्या पता कि तुम दोस्त रहो या न रहो,
क्या पता फिर से अंजान मुसाफिर ही क्यों न बन जाओ।
पर जब तुम्हारे कामयाब होने कि खबर उन तक पहुंचेगी,
तुम्हारी बातें उनके कानों में एक बार फिर से दस्तक देगी।
क्या पता तुम्हारी कामयाबी की खुशी तुमसे ज्यादा उन्हें हो जाए,
क्या पता तुम्हारी कामयाबी किसी अंजान मुसाफ़िर की कामयाबी की वजह बन जाए..

