कहा जाता है,
धरती हमें गुरुत्व से बाँधती है,
लेकिन मैंने जाना
कुछ रिश्तों का गुरुत्व
न्यूटन के नियमों से बाहर होता है।
दूरी बढ़ती रहती है,
फिर भी खिंचाव कम नहीं होता।
कोई व्यक्ति
प्रकाश वर्षों दूर चला जाए,
उसकी स्मृति
मन की कक्षा में
घूमती रहती है।
शायद प्रेम भी
एक अदृश्य बल है,
जिसे कोई यंत्र माप नहीं सकता,
पर जिसकी अनुपस्थिति
पूरी दुनिया का संतुलन बिगाड़ देती है!!

धरती हमें गुरुत्व से बाँधती है,
लेकिन मैंने जाना
कुछ रिश्तों का गुरुत्व
न्यूटन के नियमों से बाहर होता है।
दूरी बढ़ती रहती है,
फिर भी खिंचाव कम नहीं होता।
कोई व्यक्ति
प्रकाश वर्षों दूर चला जाए,
उसकी स्मृति
मन की कक्षा में
घूमती रहती है।
शायद प्रेम भी
एक अदृश्य बल है,
जिसे कोई यंत्र माप नहीं सकता,
पर जिसकी अनुपस्थिति
पूरी दुनिया का संतुलन बिगाड़ देती है!!
