Kartik227
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मृत्यु मेरे काम की नहीं,
अभी कुछ हिसाब बाकी है,
जो लोग मुझे तोड़ गए,
उनसे नहीं—खुद से जवाब बाकी है।
ज़िंदगी ने बहुत कुछ छीना,
कुछ अपने, कुछ सपने भी,
मगर हार मान लूँ इतनी जल्दी,
ये मंज़ूर नहीं है मुझसे ही।
हर चेहरा अपना नहीं होता,
हर रिश्ता सच्चा नहीं होता,
कभी-कभी भीड़ में रहकर भी,
इंसान का दिल अकेला होता।
जिसे अपना समझा, वही दूर हुआ,
जिससे उम्मीद थी, वही मजबूर हुआ,
पर हर बार टूटकर बिखर जाना—
क्या यही जीवन का दस्तूर हुआ?
आँखों में नमी है,
दिल में दर्द भी है,
फिर भी साँसें चल रही हैं,
शायद कोई मकसद अभी बाकी है।
मृत्यु मेरे काम की नहीं,
मुझे अभी जीना सीखना है,
गिरकर भी उठना है,
और खुद को फिर से लिखना है।
क्योंकि ज़िंदगी चाहे जितनी कड़वी हो,
अंत उसका मेरे हाथ में नहीं—
मैं हार सकता हूँ कुछ पलों के लिए,
पर मृत्यु मेरे काम की नहीं।
— Written by Jarvis