Kartik227
Epic Legend
क्या कसूर मेरा है
क्यों हमेशा अलग हो जाता हूँ,
जिसे अपना मानता हूँ, उसी के दिल से निकल जाता हूँ।
हर रिश्ते को सच्चे दिल से निभाता हूँ,
फिर भी जाने क्यों अकेला रह जाता हूँ।
क्या कसूर मेरा है, जो इतना अपना मान लेता हूँ?
किसी की ख़ामोशी में भी अपना दर्द जान लेता हूँ।
बात समझाना भी क्या अब कोई गुनाह है,
या सच्चा होना ही मेरी सबसे बड़ी ख़ता है?
मैं रोकता हूँ क्योंकि खोना नहीं चाहता,
समझाता हूँ क्योंकि दूर होना नहीं चाहता।
मेरी बातों में हक़ नहीं, फ़िक्र होती है,
मेरी हर शिकायत के पीछे बस मोहब्बत होती है।
फिर भी मेरी नीयत को गलत समझ लिया जाता है,
मेरा अपनापन ही बोझ समझ लिया जाता है।
जिसे संभालने की कोशिश करता हूँ हर बार,
वही मुझसे कह देता है— “तुम बदल गए हो यार।”
शायद मेरी आदत ही कुछ ऐसी है,
दिल में जगह दूँ तो पूरी तरह देता हूँ।
और जब कोई अपना दूर चला जाए,
तो खुद से भी उसका पता पूछता रहता हूँ।
क्यों हमेशा अलग हो जाता हूँ,
क्यों अपनों से ही बिछड़ जाता हूँ?
मैंने तो बस रिश्ते बचाने चाहे थे,
फिर क्यों हर बार मैं ही गलत ठहराया जाता हूँ?
— Jarvis
क्यों हमेशा अलग हो जाता हूँ,
जिसे अपना मानता हूँ, उसी के दिल से निकल जाता हूँ।
हर रिश्ते को सच्चे दिल से निभाता हूँ,
फिर भी जाने क्यों अकेला रह जाता हूँ।
क्या कसूर मेरा है, जो इतना अपना मान लेता हूँ?
किसी की ख़ामोशी में भी अपना दर्द जान लेता हूँ।
बात समझाना भी क्या अब कोई गुनाह है,
या सच्चा होना ही मेरी सबसे बड़ी ख़ता है?
मैं रोकता हूँ क्योंकि खोना नहीं चाहता,
समझाता हूँ क्योंकि दूर होना नहीं चाहता।
मेरी बातों में हक़ नहीं, फ़िक्र होती है,
मेरी हर शिकायत के पीछे बस मोहब्बत होती है।
फिर भी मेरी नीयत को गलत समझ लिया जाता है,
मेरा अपनापन ही बोझ समझ लिया जाता है।
जिसे संभालने की कोशिश करता हूँ हर बार,
वही मुझसे कह देता है— “तुम बदल गए हो यार।”
शायद मेरी आदत ही कुछ ऐसी है,
दिल में जगह दूँ तो पूरी तरह देता हूँ।
और जब कोई अपना दूर चला जाए,
तो खुद से भी उसका पता पूछता रहता हूँ।
क्यों हमेशा अलग हो जाता हूँ,
क्यों अपनों से ही बिछड़ जाता हूँ?
मैंने तो बस रिश्ते बचाने चाहे थे,
फिर क्यों हर बार मैं ही गलत ठहराया जाता हूँ?
— Jarvis



