सुनो...
हां तुम ही...
क्या वाकई में मैं तुम्हारा प्रेम हूं???
यदि हां, तो फिर मेरी बात मानते क्यूं नहीं
मेरी प्रतीक्षा, मेरे अहसासों को जानते क्यूं नहीं
मेरे शब्दों की हक़ीक़त पहचानते क्यूं नहीं हां...
शायद.... यही नियति है प्रेम की
हम प्रेम में होते तो जरूर है मगर
स्वीकारते नहीं
मगर मैंने तो स्वीकार किया है....
बोलो ना.... ये सच है ना????

हां तुम ही...
क्या वाकई में मैं तुम्हारा प्रेम हूं???
यदि हां, तो फिर मेरी बात मानते क्यूं नहीं
मेरी प्रतीक्षा, मेरे अहसासों को जानते क्यूं नहीं
मेरे शब्दों की हक़ीक़त पहचानते क्यूं नहीं हां...
शायद.... यही नियति है प्रेम की
हम प्रेम में होते तो जरूर है मगर
स्वीकारते नहीं
मगर मैंने तो स्वीकार किया है....
बोलो ना.... ये सच है ना????



















Reactions: Rockzz✨❤️श्वेतराग❤️