मृत्यु मेरे काम की नहीं,
अभी कुछ हिसाब बाकी है,
जो लोग मुझे तोड़ गए,
उनसे नहीं—खुद से जवाब बाकी है।
ज़िंदगी ने बहुत कुछ छीना,
कुछ अपने, कुछ सपने भी,
मगर हार मान लूँ इतनी जल्दी,
ये मंज़ूर नहीं है मुझसे ही।
हर चेहरा अपना नहीं होता,
हर रिश्ता सच्चा नहीं होता,
कभी-कभी भीड़ में रहकर भी,
इंसान का...