maturemumbaikar
Wellknown Ace
कुछ तो कहना चाहते हैं तुम्हें,
मगर लफ़्ज़ों में डर समाया है।
होंठों तक आते हैं अल्फ़ाज़,
पर दिल ही रुक-रुक कर रह जाता है।
कुछ तो कहना चाहते हैं तुम्हें,
मगर शब्द भी तुम्हारे सामने शर्माते हैं।
हर बार जो निकले लफ़्ज़,
लगता है तेरी मुस्कान में खो जाएंगे।
तेरी नज़रों में उलझ कर,
हम चुप रह जाते हैं,
फिर भी ये दिल बार-बार कहता है—
“कुछ तो कहना चाहते हैं तुम्हें…”
मगर लफ़्ज़ों में डर समाया है।
होंठों तक आते हैं अल्फ़ाज़,
पर दिल ही रुक-रुक कर रह जाता है।
कुछ तो कहना चाहते हैं तुम्हें,
मगर शब्द भी तुम्हारे सामने शर्माते हैं।
हर बार जो निकले लफ़्ज़,
लगता है तेरी मुस्कान में खो जाएंगे।
तेरी नज़रों में उलझ कर,
हम चुप रह जाते हैं,
फिर भी ये दिल बार-बार कहता है—
“कुछ तो कहना चाहते हैं तुम्हें…”