Kartik227
Wellknown Ace
एक समय की बात है…
दो दोस्त थे। नाम नहीं, पहचान नहीं—बस एक रिश्ता था, जो हर नाम से बड़ा था।
वे रोज़ साथ बैठते, साथ हँसते, एक-दूसरे की छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूंढ लेते।
एक की ख़ामोशी, दूसरे को समझ आ जाती थी।
एक की परेशानी, दूसरे के चेहरे पर दिख जाती थी।
वक़्त गुजरता गया…
ज़िंदगी ने दोनों को अलग रास्तों पर खड़ा कर दिया।
शुरू में बातें कम हुईं…
फिर मैसेज छोटे हो गए…
और एक दिन ऐसा आया, जब "कैसे हो?" भी पूछना बंद हो गया।
लेकिन सच ये था—
दोनों आज भी एक-दूसरे को भूल नहीं पाए थे।
एक रात, बहुत दिनों बाद,
एक ने पुरानी चैट खोली…
उंगलियाँ कीबोर्ड पर रुकी रहीं,
दिल में हजारों बातें थीं,
पर लिखा सिर्फ इतना—
“याद आ रहे हो…”
सेंड करने की हिम्मत नहीं हुई।
उधर, उसी वक्त,
दूसरा भी वही कर रहा था…
पुरानी तस्वीरें देख रहा था,
मुस्कुरा भी रहा था… और रो भी रहा था।
दोनों को लगा—
शायद अब सामने वाला बदल गया है…
शायद अब उसकी ज़िंदगी में मेरी जगह नहीं रही…
और इसी “शायद” ने
दो सबसे करीब लोगों को
अजनबी बना दिया।
कभी जो दोस्ती सबसे मज़बूत थी,
वो आज सिर्फ याद बनकर रह गई।
सबसे ज्यादा दर्द तब होता है,
जब रिश्ता खत्म नहीं होता…
बस धीरे-धीरे “खामोश” हो जाता है।
और उस खामोशी में,
हर दिन…
दिल थोड़ा-थोड़ा टूटता रहता है…
दो दोस्त थे। नाम नहीं, पहचान नहीं—बस एक रिश्ता था, जो हर नाम से बड़ा था।
वे रोज़ साथ बैठते, साथ हँसते, एक-दूसरे की छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूंढ लेते।
एक की ख़ामोशी, दूसरे को समझ आ जाती थी।
एक की परेशानी, दूसरे के चेहरे पर दिख जाती थी।
वक़्त गुजरता गया…
ज़िंदगी ने दोनों को अलग रास्तों पर खड़ा कर दिया।
शुरू में बातें कम हुईं…
फिर मैसेज छोटे हो गए…
और एक दिन ऐसा आया, जब "कैसे हो?" भी पूछना बंद हो गया।
लेकिन सच ये था—
दोनों आज भी एक-दूसरे को भूल नहीं पाए थे।
एक रात, बहुत दिनों बाद,
एक ने पुरानी चैट खोली…
उंगलियाँ कीबोर्ड पर रुकी रहीं,
दिल में हजारों बातें थीं,
पर लिखा सिर्फ इतना—
“याद आ रहे हो…”
सेंड करने की हिम्मत नहीं हुई।
उधर, उसी वक्त,
दूसरा भी वही कर रहा था…
पुरानी तस्वीरें देख रहा था,
मुस्कुरा भी रहा था… और रो भी रहा था।
दोनों को लगा—
शायद अब सामने वाला बदल गया है…
शायद अब उसकी ज़िंदगी में मेरी जगह नहीं रही…
और इसी “शायद” ने
दो सबसे करीब लोगों को
अजनबी बना दिया।
कभी जो दोस्ती सबसे मज़बूत थी,
वो आज सिर्फ याद बनकर रह गई।
सबसे ज्यादा दर्द तब होता है,
जब रिश्ता खत्म नहीं होता…
बस धीरे-धीरे “खामोश” हो जाता है।
और उस खामोशी में,
हर दिन…
दिल थोड़ा-थोड़ा टूटता रहता है…
