कैसे भूल जाऊं......
कैसे भूल जाऊँ, वो बचपन की यादें।
सरलता की बातें चलन सीधे-साधे,
वो सावन की रिमझिम में बाहर निकलना,
भरे कीचड. में फिसलना-मचलना।
हरी घास पर बैठ तितली पकड़ना,
मां का समझाना पिता का बचाना।
दोस्तो के साथ शाम तक उलझना.
पहुचते ही घर में उस डाट को झेलना।
बात ही बात में, रूठना मनाना,
वो मस्ती के दिन खुशी का जमाना।
झूठ-सच से परे वो दिन-रात,
कैसे भूल जाऊँ, वो बचपन की याद।
जो भागा बचपन तो आई जवानी,
पहले की खुशिया सब पड़ी गवानी।
घूमते फिर रहे है उलझनों को लादे,
किस तरह भूल जाऊ, वो बचपन की यादें।
कैसे भूल जाऊँ, वो बचपन की यादें।
सरलता की बातें चलन सीधे-साधे,
वो सावन की रिमझिम में बाहर निकलना,
भरे कीचड. में फिसलना-मचलना।
हरी घास पर बैठ तितली पकड़ना,
मां का समझाना पिता का बचाना।
दोस्तो के साथ शाम तक उलझना.
पहुचते ही घर में उस डाट को झेलना।
बात ही बात में, रूठना मनाना,
वो मस्ती के दिन खुशी का जमाना।
झूठ-सच से परे वो दिन-रात,
कैसे भूल जाऊँ, वो बचपन की याद।
जो भागा बचपन तो आई जवानी,
पहले की खुशिया सब पड़ी गवानी।
घूमते फिर रहे है उलझनों को लादे,
किस तरह भूल जाऊ, वो बचपन की यादें।