ना जाने कैसी मुलाकात हुई… थोड़ी बातचीत,
फिर एक दोस्ती की शुरुआत हुई… मिलना कम था हमारा…
ना जाने फिर कैसे रोज़ टकराने की शुरुआत हुई…
पहले निकल जाते थे हाल पूछकर…
ना जाने कैसे खयालों में आने की शुरुआत हुई…
यूँ तो लगा था संभल जाएंगे…
ना जाने कैसे इश्क सुलगने की शुरुआत हुई…
फिर एक रात इश्क की समा जली… थोड़ी इश्क की बात हुई…
ना जाने कैसे रातों को तारे गिनने की शुरुआत हुई…
हाँ एक रात को एक गहरे इश्क की शुरुआत हुई…
फिर एक दोस्ती की शुरुआत हुई… मिलना कम था हमारा…
ना जाने फिर कैसे रोज़ टकराने की शुरुआत हुई…
पहले निकल जाते थे हाल पूछकर…
ना जाने कैसे खयालों में आने की शुरुआत हुई…
यूँ तो लगा था संभल जाएंगे…
ना जाने कैसे इश्क सुलगने की शुरुआत हुई…
फिर एक रात इश्क की समा जली… थोड़ी इश्क की बात हुई…
ना जाने कैसे रातों को तारे गिनने की शुरुआत हुई…
हाँ एक रात को एक गहरे इश्क की शुरुआत हुई…
