ख़ामोशियाँ भी गूँज उठती हैं अब यहाँ,
जब से आँखों में बसी है उसकी हँसी।
धड़कनों ने भी छुआ है एक नया मुकाम,
वो जो दिल के करीब, रूह में है बसी।
तन्हाइयों में भी महक उठती है फिज़ा,
तेरी मौजूदगी का अहसास है कुछ यूँ नमी।
छोड़कर सारे जहाँ की खुशियाँ ,
मुझे मंजूर है बस तेरी ही हर कमी।
सितारों सी चमकती...