कैसा यह पल है, देखो, कैसा यह नज़ारा,
गहरा बैंगनी आकाश, बन गया किनारा।
रंगों की चादर ओढ़े, सुबह की यह बेला,
रात की कहानी पूरी, दिन का नया मेला।
सड़क किनारे बत्तियाँ, बुझने को हैं तैयार,
जैसे अतीत की बातें, होती हैं बेकार।
रोशनी की राह पर, अब सूर्य का है आना,
हर अँधेरे को जिसने, पल भर में जाना।
मैदान...