मंजिलें जुदा हों पर साथ वही रहता है,
दोस्ती का दरिया हर हाल में बहता है।
तूने थामी जो बांह, तो हौसला मिल गया,
पतझड़ के मौसम में भी जैसे फूल खिल गया।
न लफ़्ज़ों की ज़रूरत, न कोई वादा है,
ये रिश्ता तो दुनिया में सबसे ज़्यादा है।
तेरी बातों का सुकून, तेरा वो साथ,
जैसे तपती धूप में हो पहली बरसात।
वक़्त की...