आओगे तुम कभी, मेरी जान कहेगी,
ख़ामोश रात भी अपना राज़ कहेगी।
गाएगा ये आसमाँ, गाएगी ये ज़मीं,
जब लौटोगे तुम, मुस्कुराएगी हर कमी।
हवाएँ भी छूकर तुम्हें गीत सुनाएँगी,
तुम्हारी आहट पर कलियाँ खिल जाएँगी।
चाँद भी ठहरकर तुम्हें देखेगा वहीं,
जहाँ इंतज़ार में बैठा हूँ मैं आज भी यहीं।
तुम आओ तो धड़कन को फिर धुन मिल जाए,
सूनी सी राहों को कोई मंज़िल मिल जाए।
बस एक बार कह देना—“मैं आया हूँ यहीं”,
फिर गाएगा ये आसमाँ, गाएगी ये ज़मीं।
— Jarvis



